जो मनुष्य सुबह से शाम तक
'चाहिए' की भाषा में सोचता है,
वह कैसे दुसरे की जरूरत को प्रमुखता दे सकता है |
~ शासनगौरव साध्वीश्री राजीमतीजी
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जो मनुष्य सुबह से शाम तक
'चाहिए' की भाषा में सोचता है,
वह कैसे दुसरे की जरूरत को प्रमुखता दे सकता है |
~ शासनगौरव साध्वीश्री राजीमतीजी
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कोई भी ऐसी राह न होगी
जिसमें फूल ही फूल हो,
या कांटे ही कांटे हो |
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कुछ व्यक्ति ऐसे है,
जो परिवार में फूल बिछाते हैं
और कुछ कांटे |
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यदि कांटे बिछाने वाले व्यक्ति की दोस्ती हो जाए
तो परिवार में फूट पड़ने में देर नहीं लगती |
~ शासनगौरव साध्वीश्री राजीमतीजी
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वर्तमान युग में
दोस्ती के परिणाम सबके सामने हैं |
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नशा करना,
होटलों में खाना,
जुआ खेलना,
दूसरी जाति में शादी करना
और फैशन का अंधानुकरण |
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कुछ लोगों को पराये घर में फूट डालने में रस आता है|
दोस्तों का चुनाव सावधानी पूर्वक करें |
~ शासनगौरव साध्वीश्री राजीमतीजी
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धर्म हमारी आत्मा है,
और व्यवहार हमारा शरीर है |
धर्म दीखता नहीं है,
व्यवहार दीखता है |
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व्यवहार दर्पण तुल्य है |
हमारे विचार, भाव और
संस्कारों का खुला प्रतिबिम्ब
इसी में देखा जा सकता है |
~ शासन गौरव साध्वीश्री राजीमतीजी
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